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mahabharat 8.71.36: हे राजन! जिस कर्ण ने दृढ़तापूर्वक धनुष खींचकर आपको बाणों से पीड़ा पहुँचाई है, उसे आज अपने पापकर्म का अत्यन्त भयंकर फल मिलेगा।   |   mahabharat अध्याय 8.71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  8.71.36 
येन त्वं पीडितो बाणैर्दृढमायम्य कार्मुकम्।
तस्याद्य कर्मण: कर्ण: फलमाप्स्यति दारुणम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जिस कर्ण ने दृढ़तापूर्वक धनुष खींचकर आपको बाणों से पीड़ा पहुँचाई है, उसे आज अपने पापकर्म का अत्यन्त भयंकर फल मिलेगा।
 
O King! Karna, who has pulled his bow firmly and has tormented you with his arrows, will today receive a very dreadful consequence for his sinful act.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)