Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.71.3-4: उसकी यह दशा देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कराते हुए पाण्डुपुत्र से कहा - 'पार्थ! राजा के 'तू' कहने मात्र से तुम इतने दुःखी हो गये हो। फिर यदि धर्म में स्थित धर्मपुत्र युधिष्ठिर को तीक्ष्ण तलवार से मार डालते, तो तुम्हारी क्या दशा होती?॥ 3-4॥ | mahabharat अध्याय 8.71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽब्रवीद् वासुदेव: प्रहसन्निव पाण्डवम्।
कथं नाम भवेदेतद् यदि त्वं पार्थ धर्मजम्॥ ३॥
असिना तीक्ष्णधारेण हन्या धर्मे व्यवस्थितम्।
त्वमित्युक्त्वाथ राजानमेवं कश्मलमाविश:॥ ४॥
अनुवाद
उसकी यह दशा देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कराते हुए पाण्डुपुत्र से कहा - 'पार्थ! राजा के 'तू' कहने मात्र से तुम इतने दुःखी हो गये हो। फिर यदि धर्म में स्थित धर्मपुत्र युधिष्ठिर को तीक्ष्ण तलवार से मार डालते, तो तुम्हारी क्या दशा होती?॥ 3-4॥
Seeing his condition, Lord Krishna smilingly said to the son of Pandu - 'Parth! You have become so sad just by the king saying 'tu' to you. Then if the son of Dharma, who was established in Dharma, had killed Yudhishthira with a sharp sword, what would have been your condition?॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥