श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 24-26h
 
 
श्लोक  8.71.24-26h 
एवमुक्तोऽब्रवीत् पार्थं केशवो राजसत्तम॥ २४॥
शक्तोऽसि भरतश्रेष्ठ हन्तुं कर्णं महाबलम्।
एष चापि हि मे कामो नित्यमेव महारथ॥ २५॥
कथं भवान् रणे कर्णं निहन्यादिति सत्तम।
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ! उसके ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा - 'भरतश्रेष्ठ! तुम महाबली कर्ण को मारने में समर्थ हो। महारथी वीर, सज्जनों में श्रेष्ठ! मेरे मन में भी सदैव यही इच्छा रहती है कि तुम किसी प्रकार युद्धभूमि में कर्ण को मार डालो।'
 
The best! When he said this, Shri Krishna said to Arjun - 'Bharatshrestha! You are capable of killing the mighty Karna. Maharathi Veer, the best among good men! I also always have this desire in my mind that you should somehow kill Karna in the battlefield. 24-25 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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