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mahabharat 8.71.19: फाल्गुन! युद्धभूमि में उसके कर्मों को देखकर और समझकर मैं अत्यन्त दुःखी हूँ। अब मुझे अपने प्राणों से प्रेम नहीं रहा॥19॥   |   mahabharat अध्याय 8.71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.71.19 
सोऽहं ज्ञात्वा रणे तस्य कर्म दृष्ट्वा च फाल्गुन।
व्यवसीदामि दु:खेन न च मे जीवितं प्रियम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
फाल्गुन! युद्धभूमि में उसके कर्मों को देखकर और समझकर मैं अत्यन्त दुःखी हूँ। अब मुझे अपने प्राणों से प्रेम नहीं रहा॥19॥
 
Phalguna! I am in deep sorrow after seeing and understanding his deeds on the battlefield. I no longer love my life.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)