Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.71.11-12: महाराज! तब अर्जुन लज्जित होकर धर्मराज के चरणों में गिर पड़े, सिर झुकाकर भारतवर्ष के श्रेष्ठ राजा से बार-बार कहने लगे - 'हे राजन! आप प्रसन्न हों, प्रसन्न हों। धर्मपालन की इच्छा से भयभीत होकर मैंने जो अनुचित वचन कहे हैं, उन्हें आप क्षमा करें।' 11-12॥ | mahabharat अध्याय 8.71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! तब अर्जुन लज्जित होकर धर्मराज के चरणों में गिर पड़े, सिर झुकाकर भारतवर्ष के श्रेष्ठ राजा से बार-बार कहने लगे - 'हे राजन! आप प्रसन्न हों, प्रसन्न हों। धर्मपालन की इच्छा से भयभीत होकर मैंने जो अनुचित वचन कहे हैं, उन्हें आप क्षमा करें।' 11-12॥
Maharaj! Then Arjun felt ashamed and fell at the feet of Dharamraj, bowed his head and said again and again to the best king of India – 'O King! Be happy, be happy. Please forgive me for the inappropriate words that I have said out of fear out of desire to follow religion. 11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥