आज आपको रक्षकरूप में पाकर हम दोनों ने कष्टों के भयंकर समुद्र को पार कर लिया है। हम दोनों ही अज्ञान के कारण मोहग्रस्त हो रहे थे; किन्तु आपकी ज्ञानरूपी नौका का आश्रय लेकर हम अपने मंत्रियों सहित शोकरूपी समुद्र को पार कर गए हैं। अच्युत! हम लोग केवल आपके द्वारा ही रक्षित हैं।॥59-60॥
‘Today, having found you as our protector, we both have crossed the dreadful sea of troubles. Both of us were being deluded by ignorance; but taking shelter in the boat of your wisdom, we have crossed the sea of sorrow and grief along with our ministers. Achyuta! We are protected only by you.'॥ 59-60॥
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि युधिष्ठिरसमाश्वासने सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें युधिष्ठिरको आश्वासनविषयक सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७०॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ६३ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥