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mahabharat 8.70.52-53h: इसलिए आपकी भुजाएँ महान हैं! राजन! सत्य की रक्षा के लिए कृपया मेरे और अर्जुन दोनों के द्वारा किए गए इस अपराध को क्षमा करें। 52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  8.70.52-53h 
तस्मात् त्वं वै महाबाहो मम पार्थस्य चोभयो:॥ ५२॥
व्यतिक्रममिमं राजन् सत्यसंरक्षणं प्रति।
 
 
अनुवाद
इसलिए आपकी भुजाएँ महान हैं! राजन! सत्य की रक्षा के लिए कृपया मेरे और अर्जुन दोनों के द्वारा किए गए इस अपराध को क्षमा करें। 52 1/2॥
 
That's why you have great arms! Rajan! Please forgive this crime committed by both me and Arjun to protect the truth. 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)