श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  8.70.37 
अद्यापुत्रा सूतमाता भवित्री
कुन्ती वाथो वा मया तेन वापि।
सत्यं वदाम्यद्य न कर्णमाजौ
शरैरहत्वा कवचं विमोक्ष्ये॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
आज मेरे कारण किसी सारथी के पुत्र की माता पुत्र-हीन हो जाएगी, या कर्ण के कारण मेरी माता कुंती पुत्र-हीन हो जाएगी। मैं सत्य कह रहा हूँ। आज जब तक मैं युद्धभूमि में अपने बाणों से कर्ण का वध न कर दूँगा, मैं अपना कवच नहीं उतारूँगा।'
 
Today, the mother of a charioteer's son will be deprived of a son because of me, or my mother Kunti will be deprived of a son because of Karna. I am telling the truth. Today, I will not remove my armour until I kill Karna with my arrows on the battlefield.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)