Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.70.35: मैं शस्त्रधारियों को ही मारता हूँ, जो शस्त्रविद्या में निपुण हैं; इसीलिए मैं यहाँ सम्पूर्ण जगत का विनाश नहीं करता। श्री कृष्ण! अब हम दोनों विजयी एवं भयंकर रथ पर बैठकर शीघ्रता से उस सारथीपुत्र का वध करने के लिए चलें। | mahabharat अध्याय 8.70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये चास्त्रज्ञास्तानहं हन्मि चास्त्रै-
स्तस्माल्लोकान्नेहकरोमि भस्मसात्।
जैत्रं रथं भीममास्थाय कृष्ण
याव: शीघ्रं सूतपुत्रं निहन्तुम्॥ ३५॥
अनुवाद
मैं शस्त्रधारियों को ही मारता हूँ, जो शस्त्रविद्या में निपुण हैं; इसीलिए मैं यहाँ सम्पूर्ण जगत का विनाश नहीं करता। श्री कृष्ण! अब हम दोनों विजयी एवं भयंकर रथ पर बैठकर शीघ्रता से उस सारथीपुत्र का वध करने के लिए चलें।
I kill only those with weapons who are adept in the science of weapons; that is why I do not destroy the entire world here. Shri Krishna! Now let us both sit on the victorious and fearsome chariot and move quickly to kill the son of a charioteer. 35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥