Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.70.25-26: अर्जुन के ये वचन सुनकर धर्मात्माओं में श्रेष्ठ श्रीकृष्ण ने उससे कहा, 'पार्थ! राजा युधिष्ठिर को 'तुम' कहकर तुम इतने शोक में क्यों डूब गए? शत्रुघ्न! क्या तुम आत्महत्या करना चाहते हो? हे वीर! महात्माओं ने कभी ऐसा कर्म नहीं किया।॥ 25-26॥ | mahabharat अध्याय 8.70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुन के ये वचन सुनकर धर्मात्माओं में श्रेष्ठ श्रीकृष्ण ने उससे कहा, 'पार्थ! राजा युधिष्ठिर को 'तुम' कहकर तुम इतने शोक में क्यों डूब गए? शत्रुघ्न! क्या तुम आत्महत्या करना चाहते हो? हे वीर! महात्माओं ने कभी ऐसा कर्म नहीं किया।॥ 25-26॥
On hearing these words of Arjun, the best of the virtuous, Sri Krishna, said to him, 'Partha! Why did you sink into such deep sorrow after calling King Yudhishthira 'you'? Shatrughan! Do you wish to commit suicide? O crowned warrior! Saints have never committed such an act.॥ 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥