Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.70.23-24h: उस समय देवताओं के राजकुमार अर्जुन को बड़ा पश्चाताप हुआ। उन्होंने गहरी साँस ली और पुनः अपनी तलवार खींच ली। यह देखकर भगवान श्रीकृष्ण बोले, "अर्जुन! यह क्या है? तुम इस आकाश के समान पवित्र तलवार को पुनः म्यान से क्यों निकाल रहे हो? मुझे उत्तर दो। मैं तुम्हें तुम्हारे अभीष्ट की प्राप्ति का उपयुक्त उपाय पुनः बताऊँगा।" ॥23 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय देवताओं के राजकुमार अर्जुन को बड़ा पश्चाताप हुआ। उन्होंने गहरी साँस ली और पुनः अपनी तलवार खींच ली। यह देखकर भगवान श्रीकृष्ण बोले, "अर्जुन! यह क्या है? तुम इस आकाश के समान पवित्र तलवार को पुनः म्यान से क्यों निकाल रहे हो? मुझे उत्तर दो। मैं तुम्हें तुम्हारे अभीष्ट की प्राप्ति का उपयुक्त उपाय पुनः बताऊँगा।" ॥23 1/2॥
At that time, Arjuna, the prince of gods, felt very remorseful. He took a deep breath and drew his sword again. Seeing this, Lord Krishna said, "Arjuna! What is this? Why are you taking out this sword, which is as pure as the sky, from the sheath again? Answer me. I will again tell you a suitable way to achieve your desired goal." ॥23 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥