श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.70.21 
त्वं देवितात्वत्कृते राज्यनाश-
स्त्वत्सम्भवं नो व्यसनं नरेन्द्र।
मास्मान् क्रूरैर्वाक्प्रतोदैस्तुदंस्त्वं
भूयो राजन् कोपयेस्त्वल्पभाग्य:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! तुम एक अभागे जुआरी हो। तुम्हारे कारण ही हमारा राज्य नष्ट हुआ और तुम्हारे कारण ही हमें बड़ी विपत्ति का सामना करना पड़ा। हे राजन! अब अपने वचनों के चाबुक से हमें फिर से पीड़ा देकर हमें क्रोधित न करो।
 
Narendra! You are a luckless gambler. It is because of you that our kingdom was destroyed and because of you we faced great trouble. O King! Now do not anger us again by tormenting us with the whip of your words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)