Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.70.16: मैं तुम्हारे राज्य को बधाई नहीं देता, क्योंकि तुम अपनी ही हानि के लिए जुआ खेलने में लगे हो। स्वयं पापकर्म करके, नीच मनुष्यों से सेवा पाकर, अब तुम हमारी सहायता से शत्रु-शक्ति रूपी समुद्र को पार करना चाहते हो॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 8.70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.70.16 
न चाभिनन्दामि तवाधिराज्यं
यतस्त्वमक्षेष्वहिताय सक्त:।
स्वयं कृत्वा पापमनार्यजुष्ट-
मस्माभिर्वा तर्तुमिच्छस्यरींस्त्वम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हारे राज्य को बधाई नहीं देता, क्योंकि तुम अपनी ही हानि के लिए जुआ खेलने में लगे हो। स्वयं पापकर्म करके, नीच मनुष्यों से सेवा पाकर, अब तुम हमारी सहायता से शत्रु-शक्ति रूपी समुद्र को पार करना चाहते हो॥ 16॥
 
I do not congratulate your rule because you are addicted to gambling to your own detriment. Having committed sinful acts yourself, served by vile men, you now want to cross the sea of ​​enemy forces with the help of us.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)