Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.70.13: मैं अपनी पत्नी, पुत्र, प्राण और इस शरीर को समर्पित करके सदैव आपके प्रिय कार्य को सिद्ध करने का प्रयत्न करता हूँ। ऐसी अवस्था में भी आप मुझे अपने शब्दबाणों से मार रहे हैं; हम आपसे किंचित मात्र भी सुख प्राप्त नहीं कर सके॥13॥ | mahabharat अध्याय 8.70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यते हि नित्यं तव कर्तुमिष्टं
दारै: सुतैर्जीवितेनात्मना च।
एवं यन्मां वाग्विशिखेन हंसि
त्वत्त: सुखं न वयं विद्म किंचित्॥ १३॥
अनुवाद
मैं अपनी पत्नी, पुत्र, प्राण और इस शरीर को समर्पित करके सदैव आपके प्रिय कार्य को सिद्ध करने का प्रयत्न करता हूँ। ऐसी अवस्था में भी आप मुझे अपने शब्दबाणों से मार रहे हैं; हम आपसे किंचित मात्र भी सुख प्राप्त नहीं कर सके॥13॥
I always try to accomplish your favourite work by devoting my wife, son, life and this body. Even in such a condition you are hitting me with your verbal arrows; we could not get even a little happiness from you.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥