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mahabharat 8.70.12: हे भरतपुत्र! बुद्धिमान लोग कहते हैं कि श्रेष्ठ ब्राह्मणों का बल उनके वचनों में है और क्षत्रियों का बल उनकी भुजाओं में है; परन्तु तुम्हारा बल तो केवल तुम्हारे वचनों में है, तुम तो क्रूर हो; तुम अच्छी तरह जानते हो कि मैं कितना बलवान हूँ॥ 12॥   |   mahabharat अध्याय 8.70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.70.12 
बलं तु वाचि द्विजसत्तमानां
क्षात्रं बुधा बाहुबलं वदन्ति।
त्वं वाग्बलो भारत निष्ठुरश्च
त्वमेव मां वेत्थ यथाबलोऽहम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! बुद्धिमान लोग कहते हैं कि श्रेष्ठ ब्राह्मणों का बल उनके वचनों में है और क्षत्रियों का बल उनकी भुजाओं में है; परन्तु तुम्हारा बल तो केवल तुम्हारे वचनों में है, तुम तो क्रूर हो; तुम अच्छी तरह जानते हो कि मैं कितना बलवान हूँ॥ 12॥
 
O son of Bharata! The wise say that the strength of the best Brahmins is in their words and the strength of the Kshatriyas is in their arms; but your strength is only in your words, you are cruel; you know very well how powerful I am.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)