श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.70.11 
शतान्यष्टौ वारणानामपश्यं
विशातितै: कुम्भकराग्रहस्तै:।
भीमेनाजौ निहतान्यद्य बाणै:
स मां क्रूरं वक्तुमर्हत्यरिघ्न:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मैंने देखा है कि आज युद्धस्थल में भीमसेन ने अपने बाणों से आठ सौ शत्रु हाथियों के मस्तक, धड़ और धड़ के अग्रभाग काटकर उन्हें मार डाला है। केवल वही शत्रुसंहारक भीमसेन ही मुझसे कठोर वचन कहने का अधिकारी है ॥11॥
 
I have seen that today on the battlefield, Bhimasena has killed eight hundred enemy elephants by cutting off their foreheads, trunks and tip of the trunks with his arrows. Only that enemy-killer Bhimasena is entitled to speak harsh words to me. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)