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mahabharat 8.7.3: मैं युद्ध में प्रतापी और दस-दस हजार हाथियों का बल रखने वाले राधापुत्र कर्ण की मृत्यु का समाचार सुनकर इस शोक को सहन नहीं कर पा रहा हूँ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 8.7: कौरवपक्षके जीवित योद्धाओंका वर्णन और धृतराष्ट्रकी मूर्च्छा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 7: कौरवपक्षके जीवित योद्धाओंका वर्णन और धृतराष्ट्रकी मूर्च्छा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.7.3 
न च मृष्यामि राधेयं हतमाहवशोभनम्।
यस्य बाह्वोर्बलं तुल्यं कुञ्जराणां शतं शतम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मैं युद्ध में प्रतापी और दस-दस हजार हाथियों का बल रखने वाले राधापुत्र कर्ण की मृत्यु का समाचार सुनकर इस शोक को सहन नहीं कर पा रहा हूँ॥3॥
 
I am unable to bear this grief on hearing the news of the death of Karna, son of Radha who was glorious in war and whose both arms possessed the strength of ten thousand elephants each. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)