Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.7.26-27: अचेत होते हुए उसने कहा, "संजय! ज़रा ठहरो। पिताजी! यह अप्रिय समाचार सुनकर मैं बहुत व्याकुल हूँ। मैं बेहोश हो रहा हूँ और अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा हूँ।" | mahabharat अध्याय 8.7: कौरवपक्षके जीवित योद्धाओंका वर्णन और धृतराष्ट्रकी मूर्च्छा । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुह्यमानोऽब्रवीच्चापि मुहूर्तं तिष्ठ संजय॥ २६॥
व्याकुलं मे मनस्तात श्रुत्वा सुमहदप्रियम्।
मनो मुह्यति चाङ्गानि न च शक्नोमि धारितुम्॥ २७॥
अनुवाद
अचेत होते हुए उसने कहा, "संजय! ज़रा ठहरो। पिताजी! यह अप्रिय समाचार सुनकर मैं बहुत व्याकुल हूँ। मैं बेहोश हो रहा हूँ और अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा हूँ।"
While becoming unconscious, he said, 'Sanjay! Wait for a moment. Father! I am very upset after hearing this unpleasant news. I am losing consciousness and I am unable to control my body.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥