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mahabharat 8.7.12: राजन! गौतमवंशी शरद्वान के पुत्र महाबाहु कृपाचार्य, जो अनेक प्रकार के विचित्र अस्त्र-शस्त्रों से युद्ध करते हैं, वे भी हाथ में महान भार वहन करने में समर्थ विचित्र धनुष लेकर आपके लिए युद्ध करने को तैयार हैं॥12॥   |   mahabharat अध्याय 8.7: कौरवपक्षके जीवित योद्धाओंका वर्णन और धृतराष्ट्रकी मूर्च्छा   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 7: कौरवपक्षके जीवित योद्धाओंका वर्णन और धृतराष्ट्रकी मूर्च्छा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.7.12 
शारद्वतो गौतमश्चापि राजन्
महाबाहुर्बहुचित्रास्त्रयोधी।
धनुश्चित्रं सुमहद् भारसाहं
व्यवस्थितो योद्धुकाम: प्रगृह्य॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! गौतमवंशी शरद्वान के पुत्र महाबाहु कृपाचार्य, जो अनेक प्रकार के विचित्र अस्त्र-शस्त्रों से युद्ध करते हैं, वे भी हाथ में महान भार वहन करने में समर्थ विचित्र धनुष लेकर आपके लिए युद्ध करने को तैयार हैं॥12॥
 
Rajan! The great-armed Kripacharya, the son of Sharadvan of Gautam dynasty, who fights with many types of strange weapons, is also ready to fight for you with a strange bow in his hand capable of bearing great weight. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)