Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.69.9-11: जो कोई मुझसे कहेगा कि मेरा गाण्डीव धनुष किसी दूसरे को दे दो, मैं उसका सिर काट डालूँगा।’ मैंने मन ही मन यह प्रतिज्ञा कर ली है। हे अनन्त पराक्रमी गोविन्द! इस महाराज ने आपके सामने मुझसे ऐसा कहा है, इसलिए मैं इसे क्षमा नहीं कर सकता; मैं इस धर्मभीरु राजा का वध कर दूँगा।॥9-11॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 9-11
 
 
श्लोक  8.69.9-11 
अन्यस्मै देहि गाण्डीवमिति मां योऽभिचोदयेत्॥ ९॥
भिन्द्यामहं तस्य शिर इत्युपांशुव्रतं मम।
तदुक्तं मम चानेन राज्ञामितपराक्रम॥ १०॥
समक्षं तव गोविन्द न तत् क्षन्तुमिहोत्सहे।
तस्मादेनं वधिष्यामि राजानं धर्मभीरुकम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो कोई मुझसे कहेगा कि मेरा गाण्डीव धनुष किसी दूसरे को दे दो, मैं उसका सिर काट डालूँगा।’ मैंने मन ही मन यह प्रतिज्ञा कर ली है। हे अनन्त पराक्रमी गोविन्द! इस महाराज ने आपके सामने मुझसे ऐसा कहा है, इसलिए मैं इसे क्षमा नहीं कर सकता; मैं इस धर्मभीरु राजा का वध कर दूँगा।॥9-11॥
 
Whoever tells me to give my Gandiva bow to someone else, I will cut off his head.' I have made this vow in my mind. Infinite mighty Govind! This Maharaja has said this to me in front of you, therefore I cannot forgive him; I will kill this Dharma-fearing king.॥ 9-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)