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mahabharat 8.69.88: हे कुन्तीपुत्र! तुम्हारे भाई राजा युधिष्ठिर बड़े बुद्धिमान हैं। वे धर्म का विचार करके भी तुम पर कभी क्रोध नहीं करेंगे। इस प्रकार तुम झूठ बोलने और अपने भाई की हत्या करने के पाप से मुक्त हो जाओगे। तुम्हें बड़े हर्ष के साथ सारथीपुत्र का वध करना चाहिए ॥ 88॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  8.69.88 
भ्राता प्राज्ञस्तव कोपं न जातु
कुर्याद् राजा धर्ममवेक्ष्य चापि।
मुक्तोऽनृताद् भ्रातृवधाच्च पार्थ
हृष्ट: कर्णं त्वं जहि सूतपुत्रम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! तुम्हारे भाई राजा युधिष्ठिर बड़े बुद्धिमान हैं। वे धर्म का विचार करके भी तुम पर कभी क्रोध नहीं करेंगे। इस प्रकार तुम झूठ बोलने और अपने भाई की हत्या करने के पाप से मुक्त हो जाओगे। तुम्हें बड़े हर्ष के साथ सारथीपुत्र का वध करना चाहिए ॥ 88॥
 
O son of Kunti! Your brother King Yudhishthira is very wise. He will never get angry with you even after considering the Dharma. In this way, you will be free from the sins of lying and killing your brother. You should kill the son of a charioteer with great joy. ॥ 88॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कृष्णार्जुनसंवादे एकोनसप्ततितमोऽध्याय:॥ ६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें श्रीकृष्ण और अर्जुनका संवादविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)