श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  8.69.85 
अथर्वाङ्गिरसी ह्येषा श्रुतीनामुत्तमा श्रुति:।
अविचार्यैव कार्यैषा श्रेयस्कामैर्नरै: सदा॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
एक श्रुति है जिसके देवता अथर्वा और अंगिरा हैं, जो समस्त श्रुतियों में श्रेष्ठ है। जो मनुष्य अपना कल्याण चाहते हैं, उन्हें सदैव बिना विचारे इसी श्रुति के अनुसार आचरण करना चाहिए ॥ 85॥
 
There is a Shruti whose deities are Atharva and Angira, which is the best among all Shrutis. People who want their own welfare should always act according to this Shruti without any thought. ॥ 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)