Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.69.81: इस संसार में जब तक सम्माननीय व्यक्ति को सम्मान मिलता रहता है, तब तक वह सचमुच जीवित रहता है। जब उसे घोर अपमान मिलने लगता है, तब वह जीवित होते हुए भी मृत कहलाता है। 81।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  8.69.81 
यदा मानं लभते माननार्ह-
स्तदा स वै जीवति जीवलोके।
यदावमानं लभते महान्तं
तदा जीवन्मृत इत्युच्यते स:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में जब तक सम्माननीय व्यक्ति को सम्मान मिलता रहता है, तब तक वह सचमुच जीवित रहता है। जब उसे घोर अपमान मिलने लगता है, तब वह जीवित होते हुए भी मृत कहलाता है। 81।
 
In this world, as long as an honourable man gets respect, he is truly alive. When he starts getting great insults, then he is called dead while still alive. 81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)