श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  8.69.78 
जानाति तं पाण्डव एष चापि
पापं लोके कर्णमसह्यमन्यै:।
ततस्त्वमुक्तो भृशरोषितेन
राज्ञा समक्षं परुषाणि पार्थ॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
ये पाण्डुनन्दन राजा युधिष्ठिर जानते हैं कि इस संसार में पापी कर्ण का सामना करना आपके अतिरिक्त किसी के लिए भी असम्भव है। पार्थ! इसीलिए राजा ने अत्यन्त क्रोध में भरकर मेरे सामने ही आपके प्रति कठोर वचन कहे हैं। 78॥
 
This Pandunandan King Yudhishthir knows that it is impossible for anyone except you to face the sinful Karna in this world. Parth! That is why the king, filled with extreme anger, has spoken harsh words to you in front of me. 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)