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mahabharat 8.69.77: इसीलिए दुःखी होकर उसने क्रोध करके आपसे ये अनुचित बातें कही हैं। उसने यह भी सोचा है कि यदि अर्जुन को क्रोध न दिलाया जाए तो वह युद्ध में कर्ण को नहीं मार सकेगा, इसीलिए उसने ऐसी बातें कही हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  8.69.77 
अतस्त्वमेतेन सरोषमुक्तो
दु:खान्वितेनेदमयुक्तरूपम्।
अकोपितो ह्येष यदि स्म संख्ये
कर्णं न हन्यादिति चाब्रवीत् स:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए दुःखी होकर उसने क्रोध करके आपसे ये अनुचित बातें कही हैं। उसने यह भी सोचा है कि यदि अर्जुन को क्रोध न दिलाया जाए तो वह युद्ध में कर्ण को नहीं मार सकेगा, इसीलिए उसने ऐसी बातें कही हैं।
 
That is why being sad, he has said these inappropriate things to you in anger. He has also thought that if Arjuna is not made angry then he will not be able to kill Karna in the war, that is why he has said such things. 77.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)