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mahabharat 8.69.76: श्रीकृष्ण बोले - वीर! राजा युधिष्ठिर थक गए हैं। कर्ण ने युद्धस्थल में अपने तीखे बाणों से उन्हें घायल कर दिया है, इसीलिए वे अत्यंत दुःखी हैं। इतना ही नहीं, जब वे युद्ध नहीं कर रहे थे, तब भी एक सारथी के पुत्र ने उन पर निरन्तर बाणों की वर्षा करके उन्हें बहुत बुरी तरह घायल कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  8.69.76 
वासुदेव उवाच
राजा श्रान्तो विक्षतो दु:खितश्च
कर्णेन संख्ये निशितैर्बाणसंघै:।
यश्चानिशं सूतपुत्रेण वीर
शरैर्भृशं ताडितोऽयुध्यमान:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - वीर! राजा युधिष्ठिर थक गए हैं। कर्ण ने युद्धस्थल में अपने तीखे बाणों से उन्हें घायल कर दिया है, इसीलिए वे अत्यंत दुःखी हैं। इतना ही नहीं, जब वे युद्ध नहीं कर रहे थे, तब भी एक सारथी के पुत्र ने उन पर निरन्तर बाणों की वर्षा करके उन्हें बहुत बुरी तरह घायल कर दिया था।
 
Shri Krishna said - Brave! King Yudhishthira is tired. Karna has injured him with his sharp arrows on the battlefield, that is why he is very sad. Not only this, even when he was not fighting, the son of a charioteer had injured him very badly by continuously showering arrows on him. 76.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)