Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.69.70-71: अब मैं पाण्डवपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर को वध के योग्य नहीं समझता। कृपया मेरी इस मानसिक प्रतिज्ञा के विषय में कुछ कृपा (भाई का वध किए बिना प्रतिज्ञा की रक्षा का उपाय) बताइए। यहाँ जो उत्तम बात मैं कहने योग्य समझता हूँ, उसे पुनः सुनिए। | mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब मैं पाण्डवपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर को वध के योग्य नहीं समझता। कृपया मेरी इस मानसिक प्रतिज्ञा के विषय में कुछ कृपा (भाई का वध किए बिना प्रतिज्ञा की रक्षा का उपाय) बताइए। यहाँ जो उत्तम बात मैं कहने योग्य समझता हूँ, उसे पुनः सुनिए।
Now I do not consider Dharmaraja Yudhishthira, the son of Pandava, worthy of being killed. Please tell me some favour (a way to protect the vow without killing my brother) regarding this mental vow of mine. Listen again to the best thing that I think is worth saying here. 70-71.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥