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mahabharat 8.69.67-68h: अर्जुन बोले, 'प्रभु! आपकी वाणी किसी विद्वान् एवं बुद्धिमान व्यक्ति द्वारा दी गई सलाह के समान है और इसका पालन करने से हमारा कल्याण हो सकता है।'   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  8.69.67-68h 
अर्जुन उवाच
यथा ब्रूयान्महाप्राज्ञो यथा ब्रूयान्महामति:॥ ६७॥
हितं चैव यथास्माकं तथैतद् वचनं तव।
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले, 'प्रभु! आपकी वाणी किसी विद्वान् एवं बुद्धिमान व्यक्ति द्वारा दी गई सलाह के समान है और इसका पालन करने से हमारा कल्याण हो सकता है।'
 
Arjun said, 'Prabhu! Your speech is like the advice given by a very learned and intelligent person and by following it, it can be beneficial for us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)