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mahabharat 8.69.61: बुद्धिमान लोग कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी कार्य को करने की प्रतिज्ञा करता है और फिर उसे किसी अन्य तरीके से करता है, वह अपने अहंकार के कारण उसका लाभ नहीं उठा पाता।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  8.69.61 
य: कार्येभ्यो व्रतं कृत्वा तस्य नानोपपादयेत्।
न तत्फलमवाप्नोति एवमाहुर्मनीषिण:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान लोग कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी कार्य को करने की प्रतिज्ञा करता है और फिर उसे किसी अन्य तरीके से करता है, वह अपने अहंकार के कारण उसका लाभ नहीं उठा पाता।
 
The wise say that a person who vows to do a task and then performs it in some other way does not reap the benefits of it due to his conceit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)