य: कार्येभ्यो व्रतं कृत्वा तस्य नानोपपादयेत्।
न तत्फलमवाप्नोति एवमाहुर्मनीषिण:॥ ६१॥
अनुवाद
बुद्धिमान लोग कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी कार्य को करने की प्रतिज्ञा करता है और फिर उसे किसी अन्य तरीके से करता है, वह अपने अहंकार के कारण उसका लाभ नहीं उठा पाता।
The wise say that a person who vows to do a task and then performs it in some other way does not reap the benefits of it due to his conceit.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥