Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.69.60: परन्तु यदि बोलना आवश्यक हो जाए या न बोलने से लुटेरों को संदेह हो, तो झूठ बोलना ही बेहतर है। ऐसी स्थिति में बिना सोचे-समझे उस झूठ को ही सत्य मान लें।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  8.69.60 
अवश्यं कूजितव्ये वा शङ्केरन्नप्यकूजत:।
श्रेयस्तत्रानृतं वक्तुं तत् सत्यमविचारितम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु यदि बोलना आवश्यक हो जाए या न बोलने से लुटेरों को संदेह हो, तो झूठ बोलना ही बेहतर है। ऐसी स्थिति में बिना सोचे-समझे उस झूठ को ही सत्य मान लें।
 
But if speaking becomes necessary or if not speaking makes the robbers suspicious, then it is better to lie. In such a situation, consider that lie to be the truth without thinking. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)