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mahabharat 8.69.6: कुन्तीनन्दन! मैं यहाँ आपके द्वारा मारे जाने योग्य कोई भी व्यक्ति नहीं देखता। फिर आप आक्रमण क्यों करना चाहते हैं? क्या आप भ्रमित हो गए हैं?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.69.6 
न तं पश्यामि कौन्तेय यस्ते वध्यो भविष्यति।
प्रहर्तुमिच्छसे कस्मात् किं वा ते चित्तविभ्रम:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! मैं यहाँ आपके द्वारा मारे जाने योग्य कोई भी व्यक्ति नहीं देखता। फिर आप आक्रमण क्यों करना चाहते हैं? क्या आप भ्रमित हो गए हैं?॥6॥
 
Kuntinandan! I do not see any person here who is worthy of being killed by you. Then why do you want to attack? Have you got confused?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)