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mahabharat 8.69.59: जो लोग अन्यायपूर्वक दूसरों का धन हड़पना चाहते हैं, अपने स्वार्थ के लिए दूसरों से सत्य बोलने का धर्म पालन करवाना चाहते हैं, तो उन्हें उनके सामने चुप रहकर तथा किसी भी प्रकार कुछ न बोलकर उनसे छुटकारा पाने का प्रयत्न करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  8.69.59 
येऽन्यायेन जिहीर्षन्तो धर्ममिच्छन्ति कर्हिचित्।
अकूजनेन मोक्षं वा नानुकूजेत् कथंचन॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जो लोग अन्यायपूर्वक दूसरों का धन हड़पना चाहते हैं, अपने स्वार्थ के लिए दूसरों से सत्य बोलने का धर्म पालन करवाना चाहते हैं, तो उन्हें उनके सामने चुप रहकर तथा किसी भी प्रकार कुछ न बोलकर उनसे छुटकारा पाने का प्रयत्न करना चाहिए।
 
If those people who wish to usurp the wealth of others unjustly, want to make others follow the religion of speaking the truth for their own selfish ends, then they should try to get rid of them by remaining silent before them and not say anything in any way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)