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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 54-55
 
 
श्लोक  8.69.54-55 
तत्र ते लक्षणोद्देश: कश्चिदेवं भविष्यति॥ ५४॥
दुष्करं परमं ज्ञानं तर्केणानुव्यवस्यति।
श्रुतेर्धर्म इति ह्येके वदन्ति बहवो जना:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उचित-अनुचित का निर्णय करने के लिए तुम्हें एक संक्षिप्त संकेत देना होगा, जो इस प्रकार होगा। कुछ लोग कठिन धर्म को, जो परम ज्ञान है, तर्क द्वारा समझने का प्रयत्न करते हैं; किन्तु एक वर्ग के अधिकांश लोग कहते हैं कि धर्म का ज्ञान वेदों से प्राप्त होता है।
 
To decide between right and wrong you will have to give a brief indication, which will be like this. Some people try to understand the difficult Dharma which is the ultimate knowledge, through logic; but a majority of people of one category say that the knowledge of Dharma is obtained from the Vedas. 54-55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)