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mahabharat 8.69.52-53h: तब कहा जाता है कि उन क्रूर लुटेरों को उनका पता चल गया और उन्होंने उन्हें मार डाला। इस प्रकार अपने वचनों का दुरुपयोग करके कौशिक ने महान पाप किया, जिसके कारण उसे नरक की यातनाएँ भोगनी पड़ीं; क्योंकि वह धर्म के सूक्ष्म स्वरूप को समझने में कुशल नहीं था।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  8.69.52-53h 
ततस्ते तान् समासाद्य क्रूरा जघ्नुरिति श्रुति:।
तेनाधर्मेण महता वाग्दुरुक्तेन कौशिक:॥ ५२॥
गत: स कष्टं नरकं सूक्ष्मधर्मेष्वकोविद:।
 
 
अनुवाद
तब कहा जाता है कि उन क्रूर लुटेरों को उनका पता चल गया और उन्होंने उन्हें मार डाला। इस प्रकार अपने वचनों का दुरुपयोग करके कौशिक ने महान पाप किया, जिसके कारण उसे नरक की यातनाएँ भोगनी पड़ीं; क्योंकि वह धर्म के सूक्ष्म स्वरूप को समझने में कुशल नहीं था।
 
Then it is said that those ruthless robbers found out about them and killed them. By misusing his words in this manner, Kaushika committed a great sin, due to which he had to suffer the pain of hell; because he was not skilled in understanding the subtle form of religion. 52 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)