श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.69.5 
स दृष्ट्वा नृपशार्दूलं शार्दूलसमविक्रमम्।
हर्षकाले च सम्प्राप्ते किमिदं मोहकारितम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब आप सिंह के समान पराक्रमी, महाबली राजा युधिष्ठिर को स्वस्थ देखकर प्रसन्न हो रहे हैं, ऐसे समय में यह कौन-सा मोहमय कृत्य होने वाला है?॥5॥
 
When you are delighted to see the great king Yudhishthira, who is as valiant as a lion, healthy, what is this enchanted act that is going to happen at such a time?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)