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mahabharat 8.69.44: हे अर्जुन! लोग कहते हैं कि पूर्वजन्म में उस पशु ने घोर तपस्या करके समस्त प्राणियों का नाश करने का वरदान प्राप्त किया था; इसलिए ब्रह्माजी ने उसे अन्धा बना दिया था।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.69.44 
तद् भूतं सर्वभूतानामभावाय किलार्जुन।
तपस्तप्त्वा वरं प्राप्तं कृतमन्धं स्वयम्भुवा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! लोग कहते हैं कि पूर्वजन्म में उस पशु ने घोर तपस्या करके समस्त प्राणियों का नाश करने का वरदान प्राप्त किया था; इसलिए ब्रह्माजी ने उसे अन्धा बना दिया था।
 
Arjun! People say that in his previous life that animal had performed penance and obtained a boon to kill all living beings; therefore Lord Brahma had made him blind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)