Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.69.41: एक दिन वह किसी पशु को मारने के लिए वन में गया, परन्तु उसे कहीं कोई पशु न मिला। तभी उसने जल पीते हुए एक पशु को देखा, जो अंधा था और अपनी आँखों का काम अपनी नाक से करता था ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.69.41 
स कदाचिन्मृगं लिप्सुर्नाभ्यविन्दन्मृगं क्वचित्।
अप: पिबन्तं ददृशे श्वापदं घ्राणचक्षुषम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
एक दिन वह किसी पशु को मारने के लिए वन में गया, परन्तु उसे कहीं कोई पशु न मिला। तभी उसने जल पीते हुए एक पशु को देखा, जो अंधा था और अपनी आँखों का काम अपनी नाक से करता था ॥41॥
 
One day he went to the forest to kill an animal, but he could not find any animal anywhere. Then he saw a animal drinking water, which was blind and used its nose to do the work of its eyes. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)