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mahabharat 8.69.39: भगवान श्रीकृष्ण बोले - भरत! प्राचीन काल में बालक नाम का एक प्रसिद्ध शिकारी रहता था जो अपनी पत्नी और पुत्रों के प्राण बचाने के लिए ही हिंसक पशुओं का वध करता था, न कि किसी कामना से।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  8.69.39 
वासुदेव उवाच
पुरा व्याधोऽभवत् कश्चिद् बलाको नाम भारत।
यात्रार्थं पुत्रदारस्य मृगान् हन्ति न कामत:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले - भरत! प्राचीन काल में बालक नाम का एक प्रसिद्ध शिकारी रहता था जो अपनी पत्नी और पुत्रों के प्राण बचाने के लिए ही हिंसक पशुओं का वध करता था, न कि किसी कामना से।
 
Lord Krishna said - Bharata! In ancient times there lived a famous hunter named Balak who used to kill ferocious animals only to save the life of his wife and sons and not out of desire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)