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mahabharat 8.69.34-35h: जब किसी का सब कुछ छीना जा रहा हो, तो उसे बचाने के लिए झूठ बोलना ही उसका कर्तव्य है। वहाँ झूठ सत्य बन जाता है और सत्य असत्य बन जाता है। केवल मूर्ख ही रीति के अनुसार प्रयुक्त एक ही सत्य को सर्वत्र आवश्यक समझता है ॥34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  8.69.34-35h 
सर्वस्वस्यापहारे तु वक्तव्यमनृतं भवेत्।
तत्रानृतं भवेत् सत्यं सत्यं चाप्यनृतं भवेत्॥ ३४॥
तादृशं पश्यते बालो यस्य सत्यमनुष्ठितम्।
 
 
अनुवाद
जब किसी का सब कुछ छीना जा रहा हो, तो उसे बचाने के लिए झूठ बोलना ही उसका कर्तव्य है। वहाँ झूठ सत्य बन जाता है और सत्य असत्य बन जाता है। केवल मूर्ख ही रीति के अनुसार प्रयुक्त एक ही सत्य को सर्वत्र आवश्यक समझता है ॥34 1/2॥
 
When someone's everything is being snatched away, it is his duty to lie to save it. There, falsehood becomes truth and truth becomes falsehood. Only a fool considers the same truth, applied as per the custom, to be necessary everywhere. ॥ 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)