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mahabharat 8.69.22: कुन्तीनन्दन! आप जैसे धार्मिक व्यक्ति यह नहीं समझ सकते कि अज्ञानतावश आप अपने को धार्मिक मानकर धर्म की रक्षा करने आए हैं और पशु हिंसा पाप है। 22॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.69.22 
अविज्ञानाद् भवान् यच्च धर्मं रक्षति धर्मवित्।
प्राणिनां त्वं वधं पार्थ धार्मिको नावबुध्यसे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! आप जैसे धार्मिक व्यक्ति यह नहीं समझ सकते कि अज्ञानतावश आप अपने को धार्मिक मानकर धर्म की रक्षा करने आए हैं और पशु हिंसा पाप है। 22॥
 
Kuntinandan! A religious person like you cannot understand that out of ignorance you have come to protect the religion by considering yourself a religious person and that there is a sin of violence against animals. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)