श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.69.21 
न हि कार्यमकार्यं वा सुखं ज्ञातुं कथंचन।
श्रुतेन ज्ञायते सर्वं तच्च त्वं नावबुध्यसे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कर्तव्य और अकर्तव्य का ज्ञान संयोग से नहीं होता। यह सब शास्त्रों से जाना जाता है और तुम शास्त्रों को बिल्कुल नहीं जानते॥21॥
 
The knowledge of duty and non-duty does not come by chance. All this is known from the scriptures and you do not know the scriptures at all.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)