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mahabharat 8.69.20: पार्थ! जो मनुष्य उस निर्णय को नहीं जानता, वह कर्तव्य और अकर्तव्य का निर्णय करने में तुम्हारे समान ही असमर्थ, अविवेकपूर्ण और मोहग्रस्त हो जाता है॥20॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  8.69.20 
अनिश्चयज्ञो हि नर: कार्याकार्यविनिश्चये।
अवशो मुह्यते पार्थ यथा त्वं मूढ एव तु॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! जो मनुष्य उस निर्णय को नहीं जानता, वह कर्तव्य और अकर्तव्य का निर्णय करने में तुम्हारे समान ही असमर्थ, अविवेकपूर्ण और मोहग्रस्त हो जाता है॥20॥
 
Parth! A person who does not know that decision becomes incapable, irrational and deluded like you in deciding between duty and non-duty. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)