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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना
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श्लोक 2
श्लोक
8.69.2
तस्य कोपं समुद्वीक्ष्य चित्तज्ञ: केशवस्तदा।
उवाच किमिदं पार्थ गृहीत: खड्ग इत्युत॥ २॥
अनुवाद
उस समय उसका क्रोध देखकर सबके मन की बात जानने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा - 'पार्थ! यह क्या है? तुमने तलवार कैसे उठा ली?॥ 2॥
Seeing his anger at that time, Lord Krishna, who knew everyone's mind, asked - 'Partha! What is this? How did you pick up the sword?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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