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mahabharat 8.69.18: पार्थ! जो मनुष्य ऐसे कर्मों में सहभागी होता है जो संभव होते हुए भी असंभव हैं और जो साध्य होते हुए भी निषिद्ध हैं, वह मनुष्यों में नीच माना गया है। ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.69.18 
अकार्याणां क्रियाणां च संयोगं य: करोति वै।
कार्याणामक्रियाणां च स पार्थ पुरुषाधम:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! जो मनुष्य ऐसे कर्मों में सहभागी होता है जो संभव होते हुए भी असंभव हैं और जो साध्य होते हुए भी निषिद्ध हैं, वह मनुष्यों में नीच माना गया है। ॥18॥
 
Partha! He who associates himself with such deeds which are impossible despite being possible, and which are forbidden despite being achievable, is considered the lowest of men. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)