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न हि धर्मविभागज्ञ: कुर्यादेवं धनंजय।
यथा त्वं पाण्डवाद्येह धर्मभीरुरपण्डित:॥ १७॥
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र धनंजय! जो धर्म का भेद जानता है, वह भी आज जो तुम करना चाहते हो, वह कभी नहीं कर सकता। वास्तव में तुम धर्मभीरु होने के साथ-साथ मूर्ख भी हो॥ 17॥
O son of Pandu, Dhananjaya! One who knows the ins and outs of Dharma can never do what you want to do here today. In reality, besides being a Dharma-fearing person, you are also foolish.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥