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श्रीकृष्ण उवाच
इदानीं पार्थ जानामि न वृद्धा: सेवितास्त्वया।
काले न पुरुषव्याघ्र संरम्भं यद् भवानगात्॥ १६॥
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले- पार्थ! इस समय मुझे लगता है कि तुमने वृद्धजनों की सेवा नहीं की है। पुरुषसिंह! इसीलिए तुम अकारण क्रोधित हो गए हो।
Shri Krishna said- Parth! At this time I think that you have not served the elderly people. Purushsingh! That is why you have become angry without any reason.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥