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mahabharat 8.69.16: श्रीकृष्ण बोले- पार्थ! इस समय मुझे लगता है कि तुमने वृद्धजनों की सेवा नहीं की है। पुरुषसिंह! इसीलिए तुम अकारण क्रोधित हो गए हो।   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.69.16 
श्रीकृष्ण उवाच
इदानीं पार्थ जानामि न वृद्धा: सेवितास्त्वया।
काले न पुरुषव्याघ्र संरम्भं यद् भवानगात्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले- पार्थ! इस समय मुझे लगता है कि तुमने वृद्धजनों की सेवा नहीं की है। पुरुषसिंह! इसीलिए तुम अकारण क्रोधित हो गए हो।
 
Shri Krishna said- Parth! At this time I think that you have not served the elderly people. Purushsingh! That is why you have become angry without any reason.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)