Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.69.14-15h: पिताजी! इस अवसर पर क्या करना उचित समझते हैं? इस जगत् का भूत और भविष्य तो आप ही जानते हैं, अतः आप जैसी आज्ञा देंगे, मैं वैसा ही करूँगा।'॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 69: युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान् श्रीकृष्णका बलाकव्याध और कौशिक मुनिकी कथा सुनाते हुए धर्मका तत्त्व बताकर समझाना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  8.69.14-15h 
किं वा त्वं मन्यसे प्राप्तमस्मिन् काल उपस्थिते।
त्वमस्य जगतस्तात वेत्थ सर्वं गतागतम्॥ १४॥
तत् तथा प्रकरिष्यामि यथा मां वक्ष्यते भवान्।
 
 
अनुवाद
पिताजी! इस अवसर पर क्या करना उचित समझते हैं? इस जगत् का भूत और भविष्य तो आप ही जानते हैं, अतः आप जैसी आज्ञा देंगे, मैं वैसा ही करूँगा।'॥14 1/2॥
 
‘Father! What do you think is appropriate to do on this occasion? You alone know the past and the future of this world, so I will do as you command me.'॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)