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mahabharat 8.68.d5: वह महारथी रात्रि में अकेले ही युद्ध कर रहा था, जिससे शत्रु सैनिक भयभीत होकर युद्धभूमि से भागने लगे। उसने कर्ण पर आक्रमण करके अपने बाणों से युद्धस्थल में उपस्थित सभी लोगों को व्याकुल कर दिया; किन्तु धैर्यवान सारथीपुत्र कर्ण ने इन्द्र द्वारा दी हुई शक्ति से उसे मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  8.68.d5 
चकार योऽसौ निशि युद्धमेक-
स्त्यक्त्वा रणं यस्य भयाद् द्रवन्ते।
स चेत् समासाद्य महानुभाव:
कर्णं रणे बाणगणै: प्रमोह्य।
धैर्ये स्थितेनापि च सूतजेन
शक्त्या हतो वासवदत्तया तया॥ )
 
 
अनुवाद
वह महारथी रात्रि में अकेले ही युद्ध कर रहा था, जिससे शत्रु सैनिक भयभीत होकर युद्धभूमि से भागने लगे। उसने कर्ण पर आक्रमण करके अपने बाणों से युद्धस्थल में उपस्थित सभी लोगों को व्याकुल कर दिया; किन्तु धैर्यवान सारथीपुत्र कर्ण ने इन्द्र द्वारा दी हुई शक्ति से उसे मार डाला।
 
‘That great warrior fought alone in the night, due to which the enemy soldiers started fleeing from the battlefield out of fear. He attacked Karna and bewildered everyone in the battlefield with his arrows; but Karna, the son of a charioteer, who remained patient, killed him with the power given to him by Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)