Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.68.d2-d3: भीमसेन का शरीर रक्त से लथपथ था। फिर भी वे प्रलयकाल में यमराज की भाँति हाथ में गदा लेकर युद्धभूमि में विचरण करते रहे और अपने प्राणों की परवाह न करते हुए युद्धभूमि में एकत्रित कौरवों के साथ युद्ध करते रहे। धृतराष्ट्रपुत्रों के साथ युद्ध करते हुए भीमसेन की महान गर्जना बार-बार सुनाई देती है। | mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीमसेन का शरीर रक्त से लथपथ था। फिर भी वे प्रलयकाल में यमराज की भाँति हाथ में गदा लेकर युद्धभूमि में विचरण करते रहे और अपने प्राणों की परवाह न करते हुए युद्धभूमि में एकत्रित कौरवों के साथ युद्ध करते रहे। धृतराष्ट्रपुत्रों के साथ युद्ध करते हुए भीमसेन की महान गर्जना बार-बार सुनाई देती है।
‘Bhimasena's body was soaked in blood. Even then he roamed the battlefield with a mace in his hand like Yamaraj during the time of doomsday and without caring for his life, he fought with the Kauravas gathered in the battlefield. Bhimasena's great roar while fighting with the sons of Dhritarashtra can be heard again and again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥