Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.68.7: ‘राजकुमार अर्जुन! हमने आपसे अनेक शुभ फलों की आशा की थी; किन्तु जिस प्रकार बहुत से फूलों वाला फलहीन वृक्ष फल चाहने वालों को निराश कर देता है, उसी प्रकार आपसे हमारी सारी आशाएँ व्यर्थ हो गयीं। | mahabharat अध्याय 8.68: युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति अपमानजनक क्रोधपूर्ण वचन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘राजकुमार अर्जुन! हमने आपसे अनेक शुभ फलों की आशा की थी; किन्तु जिस प्रकार बहुत से फूलों वाला फलहीन वृक्ष फल चाहने वालों को निराश कर देता है, उसी प्रकार आपसे हमारी सारी आशाएँ व्यर्थ हो गयीं।
‘Prince Arjun! We had hoped in you to obtain many auspicious things; but just as a fruitless tree with many flowers disappoints the people who want fruits, in the same way all our hopes from you have been futile.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥